विदेशी निवेशकों ने इस साल भारतीय बाजार से सवा दो लाख करोड़ रुपए निकाले, कब रुकेगी बिकवाली?


मुंबई. भारतीय शेयर बाजारों में साल 2022 विदेशी निवेशकों (एफपीआई) द्वारा की जा रही बिकवाली के लिए भी याद रखा जाएगा. इस साल एफपीआई ने रिकॉर्ड सवा दो लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की फंड निकासी भारतीय बाजारों से की है. पिछले लगातार नौ माह से विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार में बिकवाल बने हुए हैं. इसका असर भी भारतीय स्टॉक मार्केट में देखने को मिल रहा है.

एनएसडीएल के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल अब तक, एफपीआई ने इंडियन इक्विटी मार्केट से 2,24,790 करोड़ की भारी निकासी की है, जो कि समग्र भारतीय बाजार में कुल बिकवाली का लगभग 95% है. इक्विटी, डेट, डेट-वीआरआर और हाइब्रिड सहित भारतीय बाजार में विदेशी फंड की निकासी लगभग 2,36,672 करोड़ रुपए की है.

पहली छमाही में दो लाख करोड़ से ज्यादा की निकासी
कुल मिलाकर, जून में विदेशी निवेशकों ने रिकॉर्ड फंड निकासी की. जून में इक्विटी बाजार से कुल निकासी 50,203 करोड़ रुपए की रही. यह आंकड़ा साल 2022 में महीने के हिसाब से सबसे ज्यादा है. अप्रैल-जून 2020 की अवधि से, भारतीय इक्विटी में FPI की निकासी 1,07,340 करोड़ रुपए थी. वहीं, 2022 की पहली छमाही (जनवरी-जून) में, बाजार से लगभग 2,17,358 करोड़ रुपए का फंड बाहर गया.

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क्यों हो रही बिकवाली
भारतीय बाजार से एफपीआई की बिकवाली अक्टूबर 2021 से चल रही है. फरवरी बाद रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद ये और तेजी हो गई. मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारतीय शेयर के हाई लगाने बाद विदेशी निवेशक मुनाफावसूली करने लगे. बाजार के वैल्यूएशन को लेकर कहा गया कि इस लेवल पर भारतीय बाजार महंगे लग रहे है. लिहाजा बिकवाली जारी रही.

इस के बाद युद्ध शुरू हो गया और ग्लोबल स्थिति खराब हो गई. दुनियाभर में महंगाई बढ़ने लगी और सप्लाई चेन डिस्टर्ब हो गई. अमेरिका में मंदी की आशंका और डॉलर के लगातार मजबूत होने से एफपीआई बिकवाली रुकने की बजाय और बढ़ती रही. हालांकि जुलाई में अब इसकी रफ्तार धीमी पड़ती दिख रही है.

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बिकवाली बंद होगी या जारी रहेगी
जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार ने कहा, ‘‘विदेशी विनिमय बाजार को लेकर अनिश्चितता और डॉलर के लगातार मजबूत होने से इस बात की संभावना कम है कि एफपीआई आक्रामक तरीके से भारतीय बाजार में लिवाली करेंगे. ऊंचे स्तर पर वे फिर बिकवाल बन सकते हैं.’’

कोटक सिक्योरिटीज के प्रमुख इक्विटी शोध (खुदरा) श्रीकांत चौहान ने कहा कि आगे चलकर एफपीआई के प्रवाह में उतार-चढ़ाव कायम रहेगा. भूराजनीतिक जोखिम, बढ़ती मुद्रास्फीति और केंद्रीय बैंकों द्वारा मौद्रिक रुख को सख्त किए जाने से एफपीआई उभरते बाजारों में बिकवाल बने रहेंगे.

Tags: BSE Sensex, FPI, Nifty, Share market, Stock Markets



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