Investment Tips : आपके निवेश में अच्‍छे एसेट मैनेजमेंट की क्‍या भूमिका, कैसे करें एक बेहतर एसेट मैनेजर का चुनाव?


हाइलाइट्स

अभी बाजार में 365 से ज्‍यादा पोर्टफोलियो मैनेजर और 900 से ज्‍यादा AIF मौजूद हैं.
एसेट मैनेजर आपके निवेश पर बिना जोखिम उठाए बेहतर रिटर्न दिला सकते हैं.
निजी फंड और पब्लिक पेंशन फंड भी एक्‍सपर्ट से सलाह लेकर ही निवेश करते हैं.

नई दिल्‍ली. बाजार में पैसे लगाते समय निवेशकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने लिए अच्‍छा मैनेजर चुनने की आती है. अगर आपका एसेट मैनेजर सही तरीके से निवेश नहीं करता है तो आपका पूरा पैसा डूब सकता है.

बाजार नियामक सेबी के मुताबिक, अभी बाजार में 365 से ज्‍यादा पोर्टफोलियो मैनेजर और 900 से ज्‍यादा अल्‍टरनेटिव इंफेस्‍टमेंट फंड (AIF) मौजूद हैं. यह संख्‍या तेजी से और बढ़ती ही जा रही है. बाजार विश्‍लेषकों की नजर में अमूमन बेहतर एसेट मैनेजर की तलाश म्‍यूचुअल फंड में पिछले निवेश के प्रदर्शन, अन्‍य बेंचमार्क की तुलना में ज्‍यादा रिटर्न और जोखिम से निपटकर भी अच्‍छा रिटर्न दिलाने जैसे मानकों से तय होती है. लेकिन, अब एक अच्‍छे फोलियो मैनेजर को ज्‍यादा लचीले रुख के साथ कीमतें चुनने की जरूरत पड़ती है.

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इन खूबियों वाले मैनेजर को चुनें
एक एसेट मैनेजर की सबसे बड़ी खूबी ये होनी चाहिए कि उसके पास काफी कम संख्‍या में फंड हों और उसका कोई और बिजनेस न हो, ताकि वह अपना पूरा समय आपके पैसों को बढ़ाने और उसे सही तरीके से सही जगह निवेश करने में लगाए. ऐसे मैनेजर अपने एआईएफ को कम समय के लिए लांच करते हैं और उसकी साइज को लेकर स्‍पष्‍ट गाइडलाइ भी बताते हैं. इससे पता चलता है कि ये एसेट मैनेजर आपके निवेश पर बिना जोखिम उठाए बेहतर रिटर्न दिला सकते हैं.

लंबा ट्रैक रिकॉर्ड होना जरूरी
एसेट मैनेजर की दूसरी सबसे बड़ी खूबी उसका लंबा ट्रैक रिकॉर्ड होना है. ऐसे मैनेजर जो बेंचमार्क की तुलना में लंबे समय से बेहतर रिटर्न दिलाते रहे हैं, उन पर निवेशकों को जल्‍दी भरोसा होता है. विदेशी निवेशक भी ऐसे मैनेजर्स से दूरी बना लेते हैं, जो बहुत ज्‍यादा अग्रेसिव होकर आपके पैसे लगाते हैं और शॉर्ट टर्म में ही ज्‍यादा पैसे बनाने की धारणा रखते हैं.

रणनीति में ज्‍यादा बदलाव
अगर कोई मैनेजर अथवा फोलियो मैनेजमेंट फर्म अपनी रणनीति में लगातार बड़े बदलाव कर रही है तो वह लंबे समय तक आपको रिटर्न दिलाने में चूक कर सकती है. कुछ मैनेजर्स ताबड़तोड़ रिटर्न देने वाले फंड चुनते हैं, जबकि कुछ ईएसजी आधारित निवेश की रणनीति बनाते हैं. अगर ये मैनेजर अपनी रणनीति में अचानक बदलाव लाते हैं, तो यह लांग टर्म वेल्‍थ के लिए बिलकुल प्रैक्टिकल नहीं होगा.

निवेश सलाहकार पर भरोसा
सबसे जरूरी बात ये है कि बतौर निवेशक आपको अपने सलाहकार पर भरोसा होना चाहिए. एक निवेशक को हमेशा ये मानना चाहिए उसका एसेट मैनेजर बिना किसी भेदभाव के उसे पैसे लगाने की सलाह दे रहा है. ऐसे में आपका एसेट मैनेजर अगर किसी निवेश सलाहकार से सुझाव लेकर पैसे लगाता है तो उसका चुनाव करना एकदम सही फैसला हो सकता है. सभी बड़े निजी फंड और पब्लिक पेंशन फंड भी एक्‍सपर्ट से सलाह लेकर ही निवेश को आगे बढ़ाते हैं.

Tags: Asset allocation, Business news in hindi, Investment tips, Money Making Tips, Mutual fund



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